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आपदा

आपदा प्राकृतिक या मानव निर्मित कारणों का परिणाम है, आपदा भौगोलिक क्षेत्र विशेष में एक निश्चित समय तक उस क्षेत्र के रहवासिओं के दिन-प्रतिदिन के कामकाज में गंभीर व्यवधान उत्पन्न करती है, जिससे मानवीय, भौतिक या पर्यावरणीय व्यापक हानि होती है। जिसका सामना करने के लिए उपलब्ध सामाजिक तथा आर्थिक संरक्षण कार्यविधियां अपर्याप्त होती हैं अर्थात आशंकित विपत्ति का वास्तव में घटित होना आपदा है।

आपदा प्रबंधन

आपदाओं की रोकथाम और शमन के लिए आवश्यक उपायों के नियोजन, आयोजन, समन्वय और कार्यान्वयन की सतत और एकीकृत प्रक्रिया आपदा प्रबंधन कहलाती है । मजबूत संचार, कुशल डेटाबेस, दस्तावेज और अभ्यास के साथ एक प्रभावी आपदा प्रबंधन योजना सबसे कम संभव समय में सक्रिय होने के लिए महत्वपूर्ण है। यह सभी स्तरों पर सरकार के साथ-साथ समुदाय की सक्रिय भागीदारी से उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग करके जीवन और संपत्ति के नुकसान को कम करता है। आपदा प्रबंधन योजना लक्ष्य राज्य की क्षमता का विकास करना, आपदा व गैर-आपदा स्थितियों के दौरान जीवन के लिए आवश्यक सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करना है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA)

प्रत्येक राज्य सरकार, धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी किये जाने के पश्चात यथाशीघ्र, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा राज्य के लिए ऐसे नाम से, जो राज्य सरकार की अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाये, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना करती है। छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना 01 अगस्त 2007, में हुई है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य सरकार के विभागों द्वारा अपनी विकास योजनाओं और परियोजनाओं में आपदाओं के निवारण और शमन के उपायों के एकीकरण के प्रयोजनों के लिए अपनाये जाने वाले मार्गदर्शक सिद्धांत अधिकथित एवं इसके लिए आवश्यक तकनीकी सहायता कराता है । इसके साथ ही यह राज्य में आपदा से प्रभावित व्यक्तियों को राहत के मानकों का उपबंध करने के लिए विस्तृत मार्गदर्शक सिद्धांत अधिकथित करता है ।

राज्य प्राधिकरण में एक अध्यक्ष और नौ से अनधिक उतने सदस्य होंगे जितने राज्य सरकार द्वारा विहित किये जाएं और जब तक कि नियमों में अन्यथा उपबंध न किया जाये, छत्तीसगढ़ राज्य प्राधिकरण में निम्नलिखित सदस्य हैं:-
(क) राज्य के मुख्यमंत्री जो पदेन अध्यक्ष हैं ।
(ख) मंत्री, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, पदेन उपाध्यक्ष हैं ।
(ग) सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, पदेन सदस्य सचिव ।

राज्य आपदा मोचन बल (SDRF)

किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के विशेषज्ञतापूर्ण मोचन के प्रयोजन के लिए एक राज्य आपदा मोचन बल का गठन किया जाता है। प्रदेश में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की स्थापना 07 टीम के साथ जून 2016, में की गई थी। जिसमे से 05 टीम संभागीय मुख्यालय में एवं 02 टीम ट्रेनिंग सेंटर रायपुर और ट्रेनिंग सेंटर परसदा बिलासपुर में तैनात रहेगी। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, राज्य में एक विशेष बहु कुशल, मानवीय शक्ति, आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) के लिए आपदा प्रबंधन और सामुदायिक जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

राज्य आपदा राहत निधि/ कोष (SDRF)

13 वें वित्त आयोग की अनुशंसा करने और राज्य में आपदा प्रबंधन अधिनियम अनुसरण करने के लिए राज्य आपदा राहत कोष का निर्माण किया गया है। आपदा राहत कोष के तहत सहायता राशि आयोग की अनुशंसा के तहत, अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता प्रदान करने के लिए 21 दिसम्बर 2010 से केंद्र सरकार द्वारा दिया जा रहा है। केंद्र ने आपदा राहत कोष के उपयोग के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस राशि का उपयोग आपदाओं के दौरान निर्धारित मानदंडों के अनुसार तत्काल मदद के लिए किया जाता है, जिसमें 75% केंद्र की राशि एवं 25% राज्य की राशि होती है।

राज्य आपदा शमन निधि (SDMF)

प्रदेश में राज्य आपदा शमन निधि की स्थापना अप्रैल 2020-21, में की गई है। शमन गतिविधियों पर व्यय को पूरा करने के लिए इस फंड का गठन किया गया है तथा यह राज्य कार्यकारी समिति (SEC) को उपलब्ध कराया जाएगा।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA)

प्रत्येक राज्य सरकार, धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी किये जाने के पश्चात यथाशीघ्र, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा राज्य के लिए ऐसे नाम से जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाये, एक जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना करती है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना 22 मई 2009, में हुई है।
जिला प्राधिकरण में अध्यक्ष और सात से अनधिक उतने अन्य सदस्य होंगे जितने राज्य सरकार द्वारा विहित किये जाएं और जब तक कि नियमों में अन्यथा उपबंध न किया जाये, इसमें जिले का, यथास्थिति, कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट या उपायुक्त पदेन अध्यक्ष होगा।
जिला प्राधिकरण आपदा प्रबंधन के लिए जिला योजना, समन्वय और कार्यान्वयन निकाय के रूप में कार्य करेगा एवं राष्ट्रीय प्राधिकरण और राज्य प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार जिले में आपदा प्रबन्धन के प्रयोजन के लिए सभी उपाय करेगा ।